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SIR प्रक्रिया में बड़ा झोलझाल, सरपंच के नाम से फर्जी आवेदन लगाकर मतदाताओं के नाम कटवाने का प्रयास



NBP NEWS /मानपुर, 30 जनवरी 2026

मोहला मानपुर अं चौकी जिले में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दशकों से मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं के नाम काटने के लिए ऐसे आवेदन लगाए गए हैं, जिनके कथित आवेदक खुद सामने आकर कह रहे हैं कि उन्होंने कोई आवेदन दिया ही नहीं है। बल्कि उनके नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर फर्जी आवेदन लगाए गए हैं।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ चुनावी पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभावित मतदाता एवं संबंधित सरपंच ने SDM और तहसीलदार से मुलाकात कर लिखित कथन प्रस्तुत करते हुए मतदाता सूची से नाम नहीं काटने की मांग की है। साथ ही फर्जीवाड़े को लेकर थाने में FIR दर्ज कराने की बात भी कही गई है।
ग्राम पंचायत फुलकोड़ों का मामला, 6 मुस्लिम मतदाता निशाने पर

ताजा मामला मानपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलकोड़ों से सामने आया है, जहां पंचायत क्षेत्र के 6 मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। हैरानी की बात यह है कि उक्त आवेदन में आवेदक के रूप में ग्राम पंचायत फुलकोड़ों के सरपंच परमानंद (पुरुषोत्तम) उषारे का नाम दर्ज है।

लेकिन सरपंच उषारे ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है कि उन्होंने इस तरह का कोई आवेदन प्रशासन को दिया है। उन्होंने मानपुर SDM अमित नाथ योगी को लिखित ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उनके नाम व हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर फर्जी आवेदन लगाया गया है।

सरपंच और प्रभावित मतदाता पहुंचे SDM-तहसीलदार के पास

दिनांक 29 जनवरी को सरपंच परमानंद उषारे, सभी 6 प्रभावित मुस्लिम मतदाताओं के साथ SDM मानपुर से मुलाकात करने पहुंचे। उन्होंने SDM के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि ये सभी मतदाता वर्षों से ग्राम पंचायत क्षेत्र में निवासरत हैं और उनका नाम काटने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।

SDM ने SIR प्रक्रिया की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि बिना सुनवाई और जांच के किसी भी मतदाता का नाम नहीं काटा जाएगा। इसके पश्चात सरपंच एवं प्रभावित मतदाता तहसीलदार कार्यालय भी पहुंचे और वहां भी लिखित में अपना कथन दर्ज कराया।

SDM-तहसीलदार को सौंपा गया ग्राम पंचायत का प्रस्ताव

सरपंच अपने साथ ग्राम पंचायत फुलकोड़ों का प्रस्ताव भी लेकर पहुंचे, जिसकी प्रति SDM को सौंपी गई। प्रस्ताव में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जिन 6 व्यक्तियों के नाम काटने की अर्जी लगी है, वे सभी वर्तमान में ग्राम पंचायत क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं।

सूत्रों का दावा: अन्य पंचायतों से भी ऐसे आवेदन

सूत्रों के अनुसार, मानपुर तहसील कार्यालय में नाम काटने को लेकर अन्य पंचायत क्षेत्रों से भी कई आवेदन लगे हैं, जिनमें अधिकांश नाम मुसलमान, ईसाई या मतांतरित समुदाय के बताए जा रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो रहा है।

कांग्रेस का आरोप: धार्मिक ध्रुवीकरण की साजिश

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता देवानंद कौशिक ने कहा कि—

“भाजपा शासन में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए गैर-भाजपाई मतदाताओं का नाम काटना है। भाजपा-आरएसएस धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए मुसलमान एवं ईसाई समुदाय को निशाना बना रही है। यह चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा पर सीधा प्रहार है, जिसका कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी।”

उन्होंने फॉर्म-7 भरकर नाम कटवाने को लेकर शासन की मंशा पर भी सवाल उठाए।

SDM मानपुर अमित नाथ योगी ने कहा—

 “इस संबंध में फिलहाल केवल आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रक्रिया अभी शेष है। सभी मामलों में सुनवाई होगी। संबंधित व्यक्ति सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।”

प्रभावित मतदाता का बयान

प्रभावित मतदाता सैय्यद मोहम्मद अली ने कहा- 
“हम सभी लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं। पंचायत में भाईचारे का माहौल है। लेकिन सिर्फ 6 मुसलमानों का नाम ही क्यों काटने की अर्जी लगी? सरपंच खुद कह रहे हैं कि आवेदन फर्जी है। FIR दर्ज होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।”

सरपंच का स्पष्ट आरोप: हस्ताक्षर फर्जी, FIR दर्ज कराऊंगा

सरपंच पुरुषोत्तम उषारे ने कहा—

 “मेरे नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया है। मैंने किसी का नाम कटवाने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। ये सभी मेरे गांव के लोग हैं। 6 लोगों का नाम काटने का फॉर्म भरा गया, वो भी सिर्फ मुसलमान भाइयों का। यह पूरी तरह फर्जीवाड़ा है। थाने में सूचना दे दी है और FIR दर्ज कराऊंगा।”


SIR प्रक्रिया के नाम पर सामने आया यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि चुनावी अधिकारों, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर प्रश्न बनता जा रहा है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच और FIR के बाद सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।

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