Ticker

6/recent/ticker-posts

Ad Code

जिले में धान की फसल पर कीटों का कहर, अन्नदाताओं की आंखों में आंसू | किसान बोले- फसल बचाओ


NBP NEWS / मानपुर, 27 सितंबर 
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के वनांचल क्षेत्र में किसानों की चिंता बढ़ गई है। कम बारिश के बीच अब धान की फसल में कीटों के प्रकोप ने किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। महू और ब्लास्टिंग जैसे बीमारियों ने फसल को लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचाया है। फसल को बचाने के लिए किसान दो से तीन बार कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कीटों का प्रकोप कम नहीं होने की बात किसान कह रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती के लिए कर्ज लेकर बीज, खाद और कीटनाशक दवाइयों की व्यवस्था की थी। अब फसल प्रभावित होने से उन्हें उत्पादन घटने के साथ कर्ज चुकाने की चिंता भी सताने लगी है। खेतों में खड़ी फसल को नुकसान होता देखकर किसानों में निराशा का माहौल है।

कई बार दवा छिड़कने के बाद भी नहीं थमा प्रकोप

प्रभावित किसानों के अनुसार धान की फसल में कीटों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। फसल बचाने के लिए किसानों ने अपने स्तर पर कीटनाशकों का कई बार छिड़काव किया, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। किसानों का आरोप है कि समस्या सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी अभी तक प्रभावित खेतों तक पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचे।

किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित खेतों का सर्वे कराने, फसल नुकसान का आकलन करने तथा आवश्यक राहत एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

कृषि विभाग ने कृषि वैज्ञानिकों से किया पत्राचार

मामले को लेकर क्षेत्रीय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जी.पी. ध्रुव ने बताया कि किसानों की समस्या को गंभीरता से लिया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र, राजनांदगांव को पत्राचार किया गया है। कृषि वैज्ञानिकों के क्षेत्र में पहुंचने के बाद उन्हें प्रभावित किसानों के खेतों का भ्रमण कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि खेतों का निरीक्षण करने के बाद फसल में पाए जा रहे कीटों के प्रकोप के आधार पर किसानों को उसके नियंत्रण के लिए उचित तकनीकी सलाह और मार्गदर्शन दिया जाएगा। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी दे दी गई है।

कृषि विभाग के अनुसार स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और प्रभावित किसानों को आवश्यक तकनीकी सहयोग मिल सके।

अब किसानों की नजर कृषि वैज्ञानिकों के खेत निरीक्षण और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। किसानों को उम्मीद है कि समय रहते फसल बचाने के लिए प्रभावी तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता उपलब्ध होगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ