जिले के अंबागढ़ चौकी में संयुक्त रूप से संचालित मोहला–मानपुर के केंद्रीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में नाबालिग आदिवासी छात्राओं द्वारा फिनायल पीकर आत्महत्या के प्रयास और छात्रों के साथ कथित बर्बर मारपीट के मामलों ने गंभीर रूप ले लिया है। मामला राज्य सरकार तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन और सत्तापक्ष में हड़कंप मचा हुआ है। बाल संरक्षण आयोग ने भी पूरे घटनाक्रम की अलग से जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में विद्यालय में अध्ययनरत नाबालिग छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोप सामने आने पर प्रशासन ने प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को हटा दिया, जबकि छात्रों के साथ मारपीट के मुख्य आरोपी बताए जा रहे एक पीटीआई और दो लेक्चररों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं, छात्राओं द्वारा जहर पीने के मामले को कुछ प्रशासनिक अधिकारी पारिवारिक कलह से जोड़कर देखने की बात कह रहे हैं, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
आदिवासी समाज की मांग, प्रशासन का इनकार
एकलव्य विद्यालय में अधिकांश आदिवासी छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में सर्व आदिवासी समाज ने उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग कलेक्टर तूलिका प्रजापति से कि साथ ही एक समिति बनाकर समाज के प्रतिनिधियों को बच्चों से मिलने या जांच प्रक्रिया में शामिल होने दिया जाए। हालांकि कलेक्टर ने वैधानिक कारणों का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि केवल परिजन ही बच्चों से मिल सकते हैं।
इधर भाजपा जिला अध्यक्ष की एंट्री से विवाद
आरोप है कि शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष दिलीप वर्मा अचानक जांच करने अपने समर्थकों की भीड़ के साथ विद्यालय परिसर और छात्रों के हॉस्टल में प्रवेश कर गए। आरोप है कि बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के वे न केवल परिसर में घुसे, बल्कि जिन स्टाफ सदस्यों पर शिकायतें थीं, उन्हें कड़े शब्दों में फटकार भी लगाई।
सबसे विवादास्पद पहलू यह रहा कि वायरल वीडियो में जिला भाजपा अध्यक्ष दिलीप वर्मा मारपीट करने वाले शिक्षक को कथित रूप से यह कहते नजर आ रहे हैं कि “पहली बार है इस लिए छोड़ रहे हैं अगली बार कार्यवाही की जाएगी" इस कथन ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है।
बरहाल इस पर जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ने बताया कि जिला कलेक्टर के अनुमति अनुसार हम टीम बनाकर हम सब परिसर पहुंचे थे, जिला भाजपा अध्यक्ष, डीईओ, बीईओ अं चौकी, नगरपंचायत उपाध्यक्ष और अन्य साथी उक्त घटना की जानकारी और बच्चों से मिलने पहुंचे थे। जिसमें लड़कियों की छात्रावास में स्वयं गई और डीईओ, बीईओ, जिला अध्यक्ष , नगरपंचायत उपाध्यक्ष लड़कों के छात्रावास में गए। गर्ल हॉस्टल में कोई पुरुष जांच करने नहीं पहुंचा था। यह बहुत ही संवेदनशील मामला है जिसकी जांच जारी है। बाल संरक्षण की टीम भी मौके पर पहुंच कर जांच कर रही है।
बच्चों के बयान और विरोधाभास
वायरल वीडियो में छात्रों से पूछताछ के अंश भी सामने आए हैं, जिनमें एक बच्चा रोते हुए श्री वर्मा से अपने साथ हुई क्रूर मारपीट का विवरण देता है और एकलव्य मानपुर हॉस्टल के अधीक्षक सोनू का नाम लेता है। हालांकि इसके उलट कार्रवाई मोहला के अधीक्षक को हटाकर की गई है, जिससे प्रशासनिक निर्णयों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या मारपीट के मामले में एक अधीक्षक पर कार्यवाही हुई तो दूसरे को माफी क्यों? क्या जिला अध्यक्ष को ऐसा कहना उचित था, क्या दो पर कार्यवाही बाकियों को माफी से दोहरी नीति साफ नजर नहीं आ रहा है।
प्रिंसिपल और हॉस्टल वार्डन को हटाना समाधान नहीं है ,व्यवस्था सुधारना जरूरी - भाजपा जिला अध्यक्ष दिलीप वर्मा
वही इस मसले पर सत्ता रूढ़ पार्टी भाजपा के जिला अध्यक्ष दिलीप वर्मा ने भी प्रशासनिक कार्यवाही को नाकाफी बताया है। उन्होंने कहा है कि प्रिंसिपल और हॉस्टल वार्डन को हटाना समाधान नहीं है ,व्यवस्था सुधारना जरूरी है।
आम चर्चाओं में कहा जाने लगा है कि एक तरफ अन्य राज्यों से आए शिक्षकों को वार्निंग देकर माफ किया जा रहा है। दूसरी ओर स्थानीय प्राचार्य और वार्डन पर कार्यवाही कर बाकियों को बचाया जा रहा है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।क्या प्रशासन आगे बचे दोषियों पर कार्यवाही कर पाएगी?
प्रशासन की सफाई
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बताया कि प्रकरण दर्ज कर कलेक्टर से तीन दिनों के भीतर प्रतिवेदन मांगा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच टीम में केवल बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक व्यक्ति को जांच में जाने की जानकारी नहीं है। बच्चों की काउंसलिंग के लिए तीन मनोवैज्ञानिकों की टीम से कराई जाएगी और जल्द ही पीड़ित छात्राओं से मुलाकात की जाएगी।
एफआईआर की मांग....
मोहला–मानपुर विधायक इंद्र शाह मंडावी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नाबालिग आदिवासी छात्रों के मामले में भाजपा जिला अध्यक्ष कैसे जांच अधिकारी बन गए? किसकी अनुमति से वे भीड़ लेकर परिसर में घुसे और दोषियों को माफ करने की घोषणा की? उन्होंने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
वहीं, पुलिस अधीक्षक वाई.पी. सिंह ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी नेता को विद्यालय परिसर में प्रवेश या जांच की अनुमति नहीं दी गई थी।
कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने भी स्पष्ट किया कि एकलव्य परिसर में केवल परिजनों और अधिकृत जांच अधिकारियों को ही प्रवेश की अनुमति है। यदि कोई बिना अनुमति गया है, तो वह उसका निजी निर्णय है।
बढ़ता आक्रोश
घटनाक्रम के बाद आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है। समाज का कहना है कि जब उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही, तो राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्तियो का परिसर में प्रवेश करना अन्यायपूर्ण है। समाज को भी बच्चों से मिलने दिया जाए।
इस पूरे मामले में अब यह सवाल केंद्र में है कि क्या नाबालिग आदिवासी छात्रों से जुड़े संवेदनशील प्रकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप से न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है? प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर अब सबकी नजर टिकी हुई है।
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