NBPNEWS/26 मई 2025 /रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित अंबेडकर अस्पताल में रविवार रात पत्रकारों के साथ बाउंसरों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी बाउंसरों का न केवल मुंडन कराया, बल्कि उनके खिलाफ जय स्तंभ चौक से जुलूस भी निकाला, जिसे देखने के लिए सैकड़ों लोग सड़क किनारे इकट्ठा हो गए।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पत्रकार अस्पताल में चाकूबाजी की एक घटना में घायल व्यक्ति की जानकारी लेने पहुंचे। वहां मौजूद बाउंसरों ने पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने से रोकते हुए उनके साथ मारपीट की। जब अन्य मीडियाकर्मी और प्रेस क्लब पदाधिकारी मौके पर पहुंचे, तब भी बाउंसरों का आक्रामक व्यवहार जारी रहा। यहां तक कि पुलिस की मौजूदगी में भी पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब बाउंसर एजेंसी के संचालक वसीम बाबू पिस्तौल लेकर अस्पताल पहुंचा और पत्रकारों को धमकाने लगा। पत्रकारों को अस्पताल के गेट पर ही रोक दिया गया। इसके विरोध में मीडियाकर्मियों ने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया और आधी रात तक वहां धरने पर बैठे रहे।
इस दौरान SSP डॉ. लाल उम्मेद सिंह और अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर मौके पर पहुंचे। अधीक्षक ने मीडियाकर्मियों से माफी मांगते हुए आश्वासन दिया कि अस्पताल सुरक्षा के लिए नियुक्त ‘कॉल मी सर्विस’ के टेंडर को निरस्त करने की अनुशंसा सरकार से की जाएगी।
पुलिस ने मौदहापारा थाने में एफआईआर दर्ज करते हुए बाउंसर एजेंसी के संचालक वसीम बाबू और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके घर से पिस्तौल और गोलि यां भी जब्त की गई हैं।
घटना की निंदा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं नेता श्री चंद्राकर ने कहा कि पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस घटना की निंदा करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की है।
पूर्व में भी 33 वर्षीय पत्रकार मुकेश चंद्राकर बीजापुर को एक ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने मारकर मज़दूरों के लिए बनाए गए एक आवासीय परिसर के सेप्टिक टैंक में ढक कर सीमेंट से चिनवा दिया था।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—मीडिया—की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
0 टिप्पणियाँ