शिक्षा और अनुशासन की मिसाल माने जाने वाले सैनिक स्कूल अंबिकापुर, जिला सरगुजा में इस वर्ष जिले की एक प्रतिभावान छात्रा ने जगह बनाकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। विनायक पब्लिक इंग्लिश मीडियम स्कूल, मोहला की छात्रा ओमांशी मार्गे (पिता ईश्वरी राम व माता सरस्वती मार्गे) का चयन सैनिक स्कूल में कक्षा 6वीं में हुआ है, जो कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से है।
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इस ऐतिहासिक सफलता पर विद्यालय के डायरेक्टर संजू कुमार बघेल ने संस्था प्रमुख शैलेन्द्र रामटेके, समस्त शिक्षकों, पालकों और विशेष रूप से छात्रा को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
क्या है सैनिक स्कूल?
सैनिक स्कूल भारत सरकार द्वारा संचालित पूर्णतः आवासीय (Residential) शैक्षणिक संस्थान होते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और अन्य सैन्य सेवाओं में विद्यार्थियों को तैयार करना होता है। सैनिक स्कूलों की स्थापना 1961 में की गई थी और आज देशभर में 33 से अधिक सैनिक स्कूल कार्यरत हैं।
ये स्कूल शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, शारीरिक प्रशिक्षण, नेतृत्व कौशल, और देशभक्ति का भाव inculcate करते हैं। बच्चों को न केवल कक्षा की पढ़ाई में निपुण बनाया जाता है, बल्कि उन्हें NCC, खेलकूद, परेड और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों में भी प्रशिक्षित किया जाता है।
छात्रा ओमांशी की सफलता क्यों है खास?
सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए देशभर के हजारों विद्यार्थी हर वर्ष अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा (AISSEE) देते हैं। कठिन चयन प्रक्रिया में सफलता पाना बेहद गौरव की बात होती है। ग्रामीण और नवगठित जिलों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
संस्थान का योगदान सराहनीय
विनायक पब्लिक स्कूल ने जिले के शैक्षणिक क्षेत्र में नई ऊंचाई स्थापित की है। संस्था का यह पहला छात्रा चयन है, जिससे आने वाले समय में अन्य छात्र-छात्राएं भी प्रेरित होंगे। संस्था प्रबंधन ने बताया कि वे भविष्य में और अधिक बच्चों को ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए मार्गदर्शन और विशेष प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
ओमांशी मार्गे की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि समर्पित शिक्षण, उचित मार्गदर्शन और पारिवारिक सहयोग मिले तो किसी भी छोटे से जिले का छात्र/छात्रा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। यह सफलता निश्चित रूप से मोहला जिले की बेटियों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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