छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों में शुमार शिवनाथ नदी पर निर्मित मोंगरा बैराज आज अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर जल संकट से गुजर रहा है। मोहला-मानपुर जिले के इस प्रमुख जलस्रोत का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से सूख चुका है, जो कि बीते दो दशकों में पहली बार देखने को मिला है।बैराज में केवल 2 MCA पानी ही शेष बचा है, जबकि लगभग 12 MCA पानी बैराज में अभी होना था। समय पर बारिश नहीं हुई तो इलाके में पेयजल संकट गहराने की संभावना है।
जहां कभी पानी की लहरें बहती थीं, वहां अब बंजर जमीन नजर आ रही है। बैराज का केवल कुछ हिस्सा ही जल से आच्छादित बचा है,और वही अब जिले के गांवों में पेयजल व सिंचाई की आखिरी उम्मीद बना हुआ है।
पानी के लिए तरसा मोंगरा बैराज, असर दूर-दूर तक
मोंगरा बैराज से न केवल मोहला-मानपुर जिले के गांवों को लाभ मिलता रहा है, बल्कि राजनांदगांव सहित आसपास के कई जिलों में भी पेयजल और कृषि कार्यों के लिए यह प्रमुख स्रोत रहा है। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए अब इन जिलों को भी निकट भविष्य में पानी नहीं मिल पाने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
सूखा और जल प्रबंधन की चूक बनी संकट का कारण
एक तरफ इस वर्ष अपर्याप्त वर्षा और भीषण गर्मी के कारण शिवनाथ नदी का जलस्तर लगातार गिरता गया, वहीं दूसरी ओर 28 अप्रैल से 9 मई 2025 तक 15 MCA पानी बैराज से बड़ी मात्रा में छोड़ दिया गया, जिससे जल भंडारण क्षमता प्रभावित हुई। अधिकारियों की माने तो राजनांदगांव को मई जून में जाने वाली पानी इस बार अप्रैल मई में जा चुकी है,अगर भविष्य में राजनादगांव को पानी की जरूरत पड़ती है तो उसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है।अब जबकि बैराज खाली होने की कगार पर है, इस कदम पर सवाल उठने लगे हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारी ने इस ओर कोई ठोस कदम उठाया होगा? क्या अधिक जलभराव हेतु खनन, या अन्य बैराज के निर्माण हेतु कोई कार्य किया गया होगा?, क्या जिम्मेदार अधिकारी को इस विपदा की अंदेशा नहीं रही होगी?
पर्यटन पर भी पड़ा असर
मोंगरा बैराज आमतौर पर अपने मनोहारी दृश्य, शांत वातावरण और जल विस्तार के कारण पर्यटन का केंद्र रहा है। परंतु अब बैराज की सूखी जमीन और घटता जलस्तर पर्यटकों को निराश कर रहा है। स्थानीय व्यवसायियों के अनुसार, पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे आर्थिक नुकसान की स्थिति बन गई है।
इतिहास: मोंगरा बैराज का निर्माण और महत्व
मोंगरा बैराज की नींव प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में रखी गई थी, और इसे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के शासनकाल में पूर्ण कर चालू किया गया। यह बैराज बीते दो दशकों से कृषि, जल आपूर्ति और स्थानीय अर्थव्यवस्था की धुरी बना हुआ था। लेकिन अब तक की यह सबसे भयावह जल स्थिति बताई जा रही है।
भविष्य की चिंता और समाधान की आवश्यकता
यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई और जल प्रबंधन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मोहला-मानपुर सहित इससे जुड़े पूरे अंचल को भीषण पेयजल संकट और कृषि ठहराव का सामना करना पड़ सकता है।
मोंगरा बैराज की यह स्थिति केवल एक जलाशय का संकट नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के जल नीति और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर सवाल है। समय रहते जल संरक्षण, वैकल्पिक जल स्रोतों की खोज और वर्षा जल संचयन पर ठोस कार्य योजना न बनाई गई, तो आने वाले समय में संकट और गहरा सकता है।
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