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राजनीति या धोखाधड़ी? भाजपा नेत्री के जाति प्रमाण पत्र पर उठे कई सवाल

NBPNEWS/05 जून 2025 : मोहला मानपुर अं चौकी 
राजनीतिक खुन्नस या बदनाम करने की साजिश के तहत नम्रता सिंह की छवि को धूमिल करने की क्या कोशिश की जा रही है? वाक्या को समझते हैं। जहां फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर जिला पंचायत अध्यक्ष पद तक पहुंचने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की जिला अध्यक्ष और वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह पर अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर चुनाव लड़ने का गंभीर आरोप है।
यह मामला सबसे पहले जिला पंचायत चुनाव के दौरान सामने आया था, जब उनके विरोधी शकुंतला नेताम ने आपत्ति दर्ज करवाई थी। उस समय प्रशासन द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन अब मानपुर निवासी विवेक सिंह की शिकायत के बाद मामले में पुनः तूल पकड़ा है। वही SDM ने आदेश में लिखे है कि जिले में पूर्व से ही जांच समिति गठित है जहां चाहे तो आवेदक पुनः आवेदन समिति के समक्ष कर सकता है। SDM मोहला ने जनशिकायत से आवेदन को विलोपित करने की पत्र जारी किए हैं।
सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र तभी वैध माना जाता है, जब वह 1950 से पूर्व के स्थानीय राजस्व अभिलेखों के आधार पर जारी हो। सूत्रो की माने तो नम्रता सिंह और न ही उनके पिता नारायण सिंह का नाम मोहला क्षेत्र के 1950 से पूर्व के किसी भी दस्तावेज में दर्ज है। चूंकि नारायण सिंह उड़ीसा निवासी जो कि मध्यप्रदेश 1977 कैडर के IAS अधिकारी इससे यह संदेह प्रबल हो गया है कि उनका इस क्षेत्र की अनुसूचित जनजाति से कोई परंपरागत संबंध नहीं है।
नम्रता सिंह के पिता नारायण सिंह ओडिशा निवासी व मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व IAS अधिकारी हैं। जिनका जन्म 28/02/1954 को उड़ीसा में हुआ था। मिली जानकारी के अनुसार, परिवार को जो निवास प्रमाण पत्र मिला है वह ओडिशा राज्य से जारी किया गया था। इसके उलट, नम्रता सिंह ने मोहला क्षेत्र के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर चुनाव लड़ा, जिससे अब इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। 
कानून एक राज्य की अनुसूचित जनजाति को दूसरे राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। जाति प्रमाण पत्र बनने में निवास की भूमिका मुख्यता है। सूत्रो की माने तो नारायण सिंह झाड़ा वेल्ली उड़ीसा के निवासी थे। दूसरी ओर नम्रता सिंह की नानी पानाबरस (मोहला) निवासी थीं। तो क्या ऐसे में उनके नानी के निवास के अनुसार दस्तावेज बनाए गए होंगे ?
अनुविभागीय दंडाधिकारी डॉ हेमेंद्र भूआर्य ने कहा कि पूर्व के सक्षम अधिकारी SDM द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया है और जो भी ऑनलाइन जारी किए गए पत्र विधिवत जांच कर ही प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। अगर आवेदक चाहे तो जाँच हेतु आवेदन लगा सकता है जो कि उच्च स्तरीय जांच समिति पहले से गठित रहती है वहां आवेदन कर सकता है। 

प्रशासन की ओर से जांच रिपोर्ट आने तक राजनीतिक हलकों में हलचल बनी हुई है और क्षेत्रीय जनता भी निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रही है।
दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी इस विषय में खुल कर अपना पक्ष नहीं रख रही है। जो कि लगातार क्षेत्र के विषयों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस और रैली,सभा व  धरना प्रदर्शन करते आए हैं। मोहला मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी भी आदिवासी हैं, ऐसे में इस विषय पर आदिवासियों की हक की आवाज बुलंद कब करेंगे?

कहां है आदिवासी समाज जो नम्रता सिंह पर लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से बचती नजर आ रही है। क्या यह आदिवासियों की हक व हनन का मामला नहीं? 
पूर्व में भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला गरमाया था जिसमें छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी की भी जाति प्रमाण पत्र के मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर डीडी सिंह की अध्यक्षता में बनी समिति ने 21 अगस्त 2019 को अपनी जांच रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अजीत जोगी कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं दे सके जिससे वह यह साबित कर सकें कि वह आदिवासी जाति से ताल्लुक रखते हैं।

ऐसे में विवेक सिंह पूर्व से गठित स्थायी सामाजिक पारिस्थितिक प्रमाण पत्र जांच समिति के समक्ष आवेदन लगाएंगे या फिर कोई अन्य रास्ता अपनाएंगे...?

क्या फर्जी जाति प्रमाण पत्र आरोप के मामले में व्यक्तिगत और पार्टी की छवि को खराब करने और कम समय में ऊंचे पायदान पर पहुंचे नम्रता सिंह से व्यक्तिगत या राजनीतिक रंजिश तो नहीं? यह जांच उपरांत समझ आएगा।

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