छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कक्षा पाँचवीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम 30 अप्रैल 2025 को घोषित कर दिए गए, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी छात्रों को उनकी मार्कशीट उपलब्ध नहीं कराई गई है। यह स्थिति न केवल छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित कर रही है, बल्कि पूरे प्राथमिक शिक्षा तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रही है।
जिन बच्चों का भविष्य और शैक्षणिक दिशा इस परिणाम पर आधारित है, वे आज निश्चित जानकारी के अभाव में यह तक नहीं जान पा रहे हैं कि वे पास हुए हैं या फेल। इस बीच शिक्षा विभाग 16 जून से ‘शाला प्रवेश उत्सव’ मनाने की तैयारी कर रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल से जोड़ना और नामांकन दर बढ़ाना है। लेकिन बुनियादी सवाल यह है कि जब बच्चों को उनके परिणाम की सही जानकारी ही नहीं, तो वे आगे की कक्षा में कैसे प्रवेश लेंगे?
दूसरी ओर, कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणामों को ऑनलाइन माध्यम से प्रकाशित किया गया, जिससे छात्रों व अभिभावकों को त्वरित जानकारी मिल सकी। लेकिन प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए कोई ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे दूरदराज़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले अभिभावक और बच्चे एक अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
विधायक मोहला मानपुर इंद्रशाह ने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि,प्रशासन बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रही है। पांचवीं के बाद बच्चे छठवीं कक्षा में मनचाहा स्कूल जाने में होगी दिक्कत ।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि जब से परीक्षा हुई है, तब से वे शिक्षक व स्कूल प्रबंधन से मार्कशीट की जानकारी मांग रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें “ऊपर से निर्देश नहीं आए हैं” जैसा जवाब मिलता है। ग्रामीण इलाकों में, जहाँ पहले से ही शिक्षा संसाधनों की कमी है, इस प्रकार की लापरवाही शिक्षा के प्रति बच्चों के मन में निराशा और दूरी बढ़ा सकती है।
प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के शैक्षणिक जीवन की नींव होती है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से सभी बच्चों को पास करने का आदेश जारी कर देने से पढ़ाई के स्तर में गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है। शिक्षाविदों का कहना है कि केवल सभी बच्चों को अगली कक्षा में भेज देने से शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी, बल्कि इसके लिए ठोस और योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं।
एक ओर सरकार शिक्षा को अधिकार के रूप में प्रचारित करती है, वहीं दूसरी ओर छात्रों को उनके परीक्षा परिणाम की जानकारी तक नहीं देना शिक्षा के अधिकार कानून की मूल भावना के विपरीत है।
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की चुप्पी और उदासीनता चिंताजनक है। जब तक छात्रों को उनके प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन और प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा, तब तक उनकी अगली कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया अधूरी ही मानी जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि 5वीं और 8वीं बोर्ड का घोषणा उपरांत शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। नतीजन मार्कशीट बनाने में त्रुटियां हो रही है, जिसकी वजह से मार्कशीट वितरण में देरी हो रही है।
जरूरत है कि प्राथमिक शिक्षा को गंभीरता से लिया जाए, और बच्चों को समय पर परिणाम, प्रमाण पत्र, तथा आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी शिक्षा को एक मज़बूत आधार प्रदान किया जाए, न कि केवल औपचारिकता निभाई जाए।
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