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गोण्डी पखवाड़ा 2 से 15 फरवरी तक, भाषा संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान - डॉ रीना कोमरे


NBPNEWS/02 फरवरी 2025/ मोहला-मानपुर-अ.चौकी: प्रसिद्ध भाषाविद और इतिहासकार डॉ. मोतिरावेन कंगाली की जयंती के अवसर पर 2 फरवरी से 15 फरवरी तक देशभर में गोण्डी पखवाड़ा महाउत्सव मनाया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य गोण्डी भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।  
इस पखवाड़े के दौरान गोण्डी भाषा के विद्वानों द्वारा **भाषा के प्राचीन शब्दों की व्याख्या, लिपि पठन शैली, और साहित्यिक कृतियों का उद्वाचन** किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में यह भाषा विलुप्ति की कगार पर है, वहां **गोण्डी भाषा कक्षाएं** संचालित कर लोगों को इसे बोलने और सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।  
**भाषा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास**  
गोण्डी भाषा को भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में गिना जाता है और इसका संबंध **सिंधु घाटी सभ्यता** से भी जोड़ा जाता है। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का मानना है कि यह द्रविड़ परिवार की जननी भाषा है। इसके संरक्षण को लेकर वैश्विक स्तर पर भी चिंताएं जाहिर की गई हैं, जिसके चलते **गूगल और न्यूजीलैंड की एक कंपनी ने गोण्डी भाषा के लिए यूनिकोड फॉर्मेट** भी तैयार किया है।  
**गोण्डी भाषा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व**  
भाषाविदों के अनुसार, गोण्डी भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि यह **पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक जीवन पद्धति** से भी गहराई से जुड़ी हुई है। इसे **प्रकृति की भाषा** भी कहा जाता है, क्योंकि इसके जानकार बिना किसी आधुनिक तकनीक के प्राकृतिक संकेतों को समझने और जीवन रक्षा के उपाय करने में सक्षम होते हैं।  
इस महाउत्सव को लेकर **गोण्ड समाज सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों में उत्साह** है। आयोजकों ने सभी सामाजिक संगठनों और भाषा प्रेमियों से **गोण्डी पखवाड़ा में सक्रिय योगदान देने की अपील** की है, ताकि इस प्राचीन भाषा को संरक्षित रखा जा सके।

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