जिला मोहला मानपुर अं चौकी के गोटाटोला थाना अंतर्गत पलांदुर निवासी एक बुजुर्ग ग्रामीण पर जंगली सुअर ने उस समय जानलेवा हमला कर दिया, जब वे साइकिल से अपने किसी काम से ककईपार की ओर जा रहे थे। घायल अवस्था में उन्हें पहले मोहला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक और चिंताजनक उदाहरण बनकर सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक गोवर्धन नागवंशी, उम्र 72 वर्ष, पिता स्वर्गीय दशरुराम निवासी पलांदुर, रविवार की सुबह करीब 11 बजे अपनी साइकिल से ककईपार जा रहे थे। रास्ते में सड़क से सटे एक तालाब में पहले से मौजूद एक जंगली सुअर ने उन्हें देख अचानक हमला कर दिया। सुअर के इस हमले से गोवर्धन नागवंशी बुरी तरह घायल हो गए। उनके पेट से अतड़ी बाहर,पीठ में बड़ा गड्ढा,जांघ और पैरों पर गंभीर चोटें आईं थी।
हमले की आवाज सुनकर आसपास के खेत में काम कर रहे गंगाराम और कैलाश नामक ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह गोवर्धन को बचाया। तत्काल 108 एम्बुलेंस को सूचना दी गई, जिसके माध्यम से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला लाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
### एक सप्ताह में तीन हमले
यह घटना एक सप्ताह में जंगली सुअर के हमले की तीसरी घटना है। ग्रामीण का अभी गर्मी के इस मौसम में तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य जोरों पर है, और लोग सुबह 3 बजे से ही जंगलों की ओर निकल रहे हैं। ऐसे समय में जंगली जानवरों से मुठभेड़ की आशंका बढ़ जाती है। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य सूर्योदय के बाद ही करें और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लोग समूह में जाएं, जिससे वन्य जीवों के हमलों को रोका जा सके।
### वन विभाग ने की पुष्टि, देगा मुआवजा
इस दुखद घटना पर वनमंडलाधिकारी दिनेश पटेल ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि गोवर्धन नागवंशी की मौत वन्य प्राणी हमले के कारण हुई है, और विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने बताया कि मृतक के परिजनों को 25,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि सोमवार को प्रदान की जाएगी। शासन के नियमानुसार, वन्य प्राणी हमले में जनहानि होने पर 6 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दी जाती है, जिसमें शेष 5 लाख 75 हजार रुपये की प्रक्रिया जल्द पूरी कर राशि प्रदान की जाएगी।
### सवाल खड़े करता हादसा
यह घटना एक बार फिर प्रशासन और वन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़ा करती है। लगातार हो रहे वन्य जीव हमले और जंगल के किनारे बसे गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम न होने से ग्रामीणों की जान जोखिम में है। यह ज़रूरी है कि वन विभाग और प्रशासन मिलकर जागरूकता कार्यक्रम, मुनादी और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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