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5 लाख की रिश्वत, 17 धाराएं और ACB की विफलता – थानेदार से एसपी तक जांच की मांग

NBPNEWS/मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 
जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक सड़क हादसे के बाद हुए चक्काजाम में आम ग्रामीणों पर दर्ज संगीन धाराओं से नाम हटाने के एवज में 5 लाख रुपए रिश्वत मांगने के आरोपी चिल्हाटी थाने के प्रभारी रविशंकर डहरिया के खिलाफ उठी कार्रवाई की मांग अब जिले के पुलिस अधीक्षक वाईपी सिंह तक जा पहुंची है।
इस पूरे प्रकरण में विधायक इंद्र शाह मंडावी ने आज मोहला में पत्रकार वार्ता आयोजित कर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि थानेदार डहरिया के रिश्वतखोरी के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई विफल रही और इस विफलता के पीछे जिला पुलिस अधीक्षक की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
**थानेदार ने मांगी 5 लाख की रिश्वत**
विधायक मंडावी ने जानकारी दी कि 20 अक्टूबर 2024 को चिल्हाटी-मुड़पार सड़क पर एक 25 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत सड़क हादसे में हो गई थी। इसके विरोध में अगले दिन 21 अक्टूबर को सैकड़ों ग्रामीणों ने महाराष्ट्र स्टेट हाइवे पर चक्काजाम कर उचित कार्रवाई और मुआवजे की मांग की थी। विधायक स्वयं मौके पर मौजूद थे और उन्होंने ग्रामीणों को समझाकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त कराया था।
लेकिन इसके बाद, चिल्हाटी थानेदार रविशंकर डहरिया ने बदले की भावना से काम करते हुए 11 निर्दोष ग्रामीणों पर बीएनएस की 17 संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। इतना ही नहीं, एफआईआर से नाम हटाने के लिए 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई।
**रंगे हाथ पकड़ने पहुंची ACB, लेकिन अफसरों ने भगाया थानेदार को**
4 अप्रैल को पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर से की थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए 21 अप्रैल को ACB की टीम थानेदार को रंगे हाथ पकड़ने चिल्हाटी पहुंची, लेकिन कार्रवाई से पहले ही विभागीय अफसरों ने थानेदार को सूचना देकर उसे मौके से फरार करा दिया। उसे मानपुर भेज दिया गया, जिससे रिश्वतखोरी की कार्रवाई विफल हो गई।
**एसपी वाईपी सिंह की भूमिका पर उठे सवाल**
विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में एसपी वाईपी सिंह की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी कार्यालय में कथन के नाम पर बुलाए गए 11 ग्रामीणों को पुलिसिया धमकी देकर डराया गया। उन्होंने मांग की है कि थानेदार द्वारा रिश्वत मांगने, एफआईआर में बढ़ा-चढ़ाकर धाराएं जोड़ने, और ACB कार्रवाई को विफल करने में जिला प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
**चक्का जाम के आरोपी — व्यापारी, शिक्षक और आम ग्रामीण**
इस मामले में जिन 11 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें स्थानीय व्यापारी, शिक्षक और आम ग्रामीण शामिल हैं। जिन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है, वे अत्यंत गंभीर हैं। इनमें पुलिस पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा, गाली-गलौज, उकसाने, सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। जिन धाराओं का प्रयोग किया गया है वे हैं — धारा 49, 56, 57, 61, 121(1), 126(1), 132, 189(2), 190, 191(2), 192, 195(1), 221, 223(ख), 224, 285, 352 बीएनएस।
**विधायक ने कहा — मासूम ग्रामीणों को फंसाया गया है**
विधायक इंद्र शाह मंडावी ने स्पष्ट कहा कि मासूम ग्रामीणों को झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने रिश्वत नहीं दी, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि आंदोलन में मौजूद कुछ बड़े राजनीतिक चेहरे एफआईआर से बाहर हैं। उन्होंने पूछा कि जब वे स्वयं मौके पर मौजूद थे, तो फिर केवल आम लोगों को ही क्यों आरोपी बनाया गया?
**निष्पक्ष जांच की उठी मांग**
इस गंभीर मामले में विधायक ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और डीजीपी से पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण देने जैसा होगा। उन्होंने चेताया कि यदि मामले की जांच नहीं हुई तो वे विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाएंगे।


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