NBPNEWS/10 जनवरी 2025/ मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले के चिलहाटी थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार अपने चरम पर है। शराब कोचियों द्वारा इलाके में 5 से 6 अवैध शराबखाने संचालित किए जा रहे हैं, जहां बेखौफ शराब की बिक्री, परोसी और पिलाई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने से कतराते नजर आ रहे हैं।
**प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल**
जिले के पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह जहां नक्सलवाद और सामाजिक अपराधों को खत्म करने में जुटे हैं, वहीं स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी विभाग की छवि धूमिल कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, शराब कोचियों से हर महीने मोटी रकम लेकर उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे इन अवैध शराबखानों पर कार्रवाई नहीं हो रही। जबकि चिलहाटी में थाना और अं चौकी में जिला आबकारी विभाग का कार्यालय है।
**खुल्लम-खुल्ला मड़ई मेले में शराब की बिक्री**
चिलहाटी में आयोजित मड़ई मेले में अवैध शराब की जमकर बिक्री हो रही है। इस मेले में शराब खुलेआम परोसी जा रही है, जिससे स्थानीय संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता अपराधियों को और अधिक साहस प्रदान कर रही है।
**रासायनिक शराब से बढ़ता स्वास्थ्य संकट**
स्थानीय स्तर पर बनाई जा रही यूरिया और रसायनों से बनी शराब लोगों की सेहत के लिए घातक साबित हो रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों की माने तो इस प्रकार की शराब के सेवन से लीवर, किडनी और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। पिछले कुछ महीनों में नकली शराब के कारण कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
**कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा**
हालांकि, आबकारी और पुलिस विभाग ने कुछ मामूली कार्रवाई करने का दावा किया है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया गया है। इन विभागों द्वारा किसी भी बड़े अपराधी पर हाथ डालने से परहेज किया जा रहा है।
**ग्रामीणों में आक्रोश**
गांव के लोगों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अगर अवैध शराबखानों पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
**समाज और स्वास्थ्य पर खतरा**
अवैध शराब के सेवन से न केवल स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है, बल्कि यह समाज में अपराध और अशांति को भी बढ़ावा देता है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वह इस गंभीर समस्या का संज्ञान ले और सख्त कदम उठाए।
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन शराब कोचियों पर लगाम लगाएगा, या फिर यह अवैध कारोबार यूं ही चलता रहेगा?
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