स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 12 अक्टूबर 2024 (दशहरा )से 24 घंटे गली लाइट जल रही है वही पंचायत सचिव इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं क्योंकि बिजली बिल का भुगतान उनके घर या जेब से नहीं होता है। यह लापरवाही पंचायत के राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ सरकार द्वारा बिजली आपूर्ति के लिए की जा रही कोशिशों पर भी सवाल उठाती है।
गौरतलब है कि जिले के कई गांव आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में ग्राम ढारनी में 24 घंटे स्ट्रीट लाइट्स का जलना बिजली के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। पंचायत द्वारा कई महीनों से इस समस्या पर ध्यान न देने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
अब सवाल यह उठता है कि इस अतिरिक्त बिजली खपत का बिल कौन भरेगा? क्या पंचायत का मुखिया सरपंच जिम्मेदार? क्या पंचायत प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा, या फिर इसका भार आम जनता पर डाला जाएगा? यह मुद्दा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। क्या इसके लिए जिम्मेदारों के तनख्वाह से वसूली होनी चाहिए?
पूर्व में भी ग्राम पंचायत ढोढरी का यही आलम था, 4 से 5 माह लगातार 24 घंटे गली लाइट जल रही थी। जिसमें NBPNEWS की खबर के उपरांत कार्यपालन अधिकारी मानपुर ने संज्ञान में लेकर कार्यवाही की।
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